मेरे विद्यालय के बच्चे, छोटे-छोटे, नटखट-खोटे।
रोते हैं खिलखिलाते हैं, कभी-कभी मुस्कुराते हैं।
शोर मचाते, करते शरारत, भोले जैसे दिखते बच्चे।
इनकी मीठी तोतली बोली जीवन में रस भर देती है।
काश मैं इनसा हो पाउूं, इनके जीवन में रस भर दूं।
शिक्षा हो मीठी इतनी कि शक्कर फीकी पड. जाये।
काश, मैं जीवन में इनके इतनी सच्चाई भर पाउूं,
जीवन के कांटो से कभी ये, फिर विचलित न हो पाएं,
करके विकास ये जीवन का, देश का मान बढायेंगें,
सच्चाई के पथ पर सदा ये आगे बढते जायेंगे।
छोटे-छोटे ये नटखट बच्चे जीवन में रस को घोलेंगे,
इस देश-समाज की सेवा में जीवन अपना घोलेंगे।
मेरे विद्यालय के बच्चे, छोटे-छोटे, नटखट-खोटे।
रोते हैं खिलखिलाते हैं, कभी-कभी मुस्कुराते हैं।
शोर मचाते, करते शरारत, भोले जैसे दिखते बच्चे।
इनकी मीठी तोतली बोली जीवन में रस भर देती है।
काश मैं इनसा हो पाउूं, इनके जीवन में रस भर दूं।
शिक्षा हो मीठी इतनी कि शक्कर फीकी पड. जाये।
काश, मैं जीवन में इनके इतनी सच्चाई भर पाउूं,
जीवन के कांटो से कभी ये, फिर विचलित न हो पाएं,
करके विकास ये जीवन का, देश का मान बढायेंगें,
सच्चाई के पथ पर सदा ये आगे बढते जायेंगे।
छोटे-छोटे ये नटखट बच्चे जीवन में रस को घोलेंगे,
इस देश-समाज की सेवा में जीवन अपना घोलेंगे।
मेरे विद्यालय के बच्चे, छोटे-छोटे, नटखट-खोटे।
No comments:
Post a Comment